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आलू की फसल पर मंडरा रहा फफूंद का खतरा, समय रहते न संभले तो हो सकता है भारी नुकसान
आलू की फसल में लेट ब्लाइट और अर्ली ब्लाइट जैसे रोग सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. शुरुआत में पत्तियों पर हल्के भूरे या काले धब्बे दिखाई देते हैं, फिर धीरे-धीरे पत्तियां सूखने लगती हैं. अगर समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह रोग तनों और कंदों तक पहुंच जाता है, जिससे आलू सड़ने लगते हैं और बाजार में उनकी कीमत भी गिर जाती है.
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घर की छत या बालकनी में उगाएं अरबी, जानिए कितनी धूप और कितना पानी है जरूरी
अरबी को कई जगहों पर घुइयां, कचालू या टारो के नाम से भी जाना जाता है. यह एक कंद वाली सब्जी है, जिसमें भरपूर पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसके बड़े-बड़े दिल के आकार के पत्ते न सिर्फ देखने में सुंदर लगते हैं, बल्कि घर की सजावट में भी चार चांद लगा देते हैं. यही वजह है कि कई लोग अरबी को सजावटी पौधे के रूप में भी गमले में लगाते हैं.
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IRRI Report: धान की खेती अब गेहूं जैसी! डायरेक्ट सीडेड राइस से बदलेगा खेती का तरीका- जानें कैसे
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने ऐसी किस्मों पर काम किया जो तेजी से अंकुरित हों, मजबूत पौध बनें और कीट-रोगों का सामना कर सकें. कई मौसमों में किए गए परीक्षणों में यह सामने आया कि डायरेक्ट सीडेड पद्धति से उगाई गई कुछ उन्नत किस्मों ने करीब 15 प्रतिशत ज्यादा उपज दी.
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इस राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, 500 एकड़ में बनेगी कोको सिटी.. आदिवासी करेंगे केसर की खेती
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यभर में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिसमें सुभाष पालेकर का सहयोग लिया जाएगा. उन्होंने आंध्र प्रदेश के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया.
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स्वाद और सेहत दोनों में नंबर-1, रसभरी की खेती से होगा किसानों को लाखों का मुनाफा- ऐसे करें शुरुआत
रसभरी की खेती की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसके लिए बहुत बड़ी जमीन की जरूरत नहीं होती. अगर किसान सिर्फ दो बीघा जमीन में भी इसकी खेती करता है, तो साल भर में 2 से 3 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है. बड़े शहरों में होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और फल मंडियों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
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Tinda Ki Kheti: फरवरी की यह सब्जी करेगी कमाल, 45 दिन में तैयार देसी टिंडा से होगी मोटी कमाई
कई इलाकों में किसान अब फरवरी में देसी टिंडा की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. वजह साफ है यह फसल करीब 45 से 50 दिन में तैयार हो जाती है और उस समय बाजार में इसकी आवक सीमित रहती है. जब मंडी में सब्जी कम होती है, तो दाम अपने आप बढ़ जाते हैं. यही कारण है कि सही समय पर देसी टिंडा लगाने वाले किसानों को बढ़िया मुनाफा मिल रहा है.








